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jummangiri

Ghulami ka Patta

डाल के ग़ुलामी का पटटा हमें ये बताना ह।
दरी बिछाते आये है और आगे भी भिछाना है।

हमारे ज़िम्मे ही संविधान को और पप्पू को बचाना है।
इसीलिए ता उमर हमही को दरी बिछाना है।

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