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Hijaab ka normalisation

Hijaab ka normalisation

इस्लाम धर्म का सामान्यीकरण :

लिबरल मुसलमान या कहलो उर्दू नाम वाले ही इसके सामान्यीकरण के ज़्यादा ज़िम्मेदार है। दुनिया भर में इस्लाम के मानने वाले अपने धर्म में लिखी हुई बातों पे अटल है, वहीं लिबरल मुसलमान अपने आप को हमेशा ग़ैर मुस्लिमों के जीवन शैली में ढाल रहे है।

भारत में मुसलमान के पहचान पर अक्सर असामाजिक तत्व के द्वारा नए तरीके से हमले हुए है , उदाहरण के तौर पे दाढ़ी वाले का लिंचिंग, बकरीद में बकरे न काट के केक काटने का सलाह देना, मस्जिदों पे हमले, आज़ान होने पे ऐतराज़ जताना, हज भवन की ज़मीन पर होशपीटाल बनाने की मांग करने में “जब मुल्ले काटे जायेंगे राम राम चिल्लायेंगे जैसे नारा लगाना”, नमाज़ होने के विरोध जय श्री राम जैसे नारा लगा कर नमाज़ रोकना, तीन तलाक़ वाले मुद्दे आदि।

उसी करि में एक और नया जुड़ रहा है कर्णाटक के कई स्कूल में पर्दा को बंद करवाना यानी जो मुस्लिम आगे शिक्षा प्राप्त करने को इच्छुक है उन्हें हिजाब पहन के जाने देने से रोक लगाया जाना शरू कर दिया है। हाला के ये मामला अभी पुरे भारत में नहीं पहुंचा है लेकिन अगर इस मामले का भी विरोध दर्ज करा कर अदालत से कोई निष्कर्ष न निकला तो ये मामला भारत के हर मुस्लिम माँ बहनो को झेलना पर सकता है।

एक तरफ कुछ बहादुर मुस्लिम बहने अपने हिजाब को हक़ बता कर इसपर ऐसी कोई रोक न हो उसके लिए दिन रात प्रोटेस्ट कर रही है, वही दूसरी ओर ये देखा गया के हिन्दुओ में कुछ लोगो ने हिजाब के विरोध ही एक रैली निकाल दी। जिसमे उनका मांग है के अगर हिजाब की इजाज़त दी गयी तो हम भगवा रंग का कपडा पहन कर स्कूल जायेंगे। इस रैली में हिन्दू लड़कियों ने भगवा रंग का दुपट्टा पहना हुआ था।

अब यह मसला ज़िद, हठधर्मी का बन चुका है जिससे एक बार फिर हिन्दू मुस्लिम तनाव का माहौल पैदा होता हुआ देखा जा सकता है और हो सकता है के आखिर यही नतीजा निकलेगा कि किसी को भी हिजाब या भगवा पहनने की इजाजत नहीं मिलेगी जबकि भगवा रंग पहन कर स्कूल जाते हुए आज से पहले शायद ही लोगो ने किसी को देखा होगा वही लगभग साड़ी मुस्लिम लड़कियां हिजाब पहना करती है।

         

 

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