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jummangiri

Mai jumman hoon

Mai jumman hoon

कि मैं एक जुम्मन हूँ कि मैं एक अब्दुल हूँ।
कि मैंने बेचा अपना ज़मीर।
लहू से लिखी है तहरीर।
मंच से मैंने की तक़रीर।
कि मैं एक जुम्मन हूँ कि मैं एक अब्दुल हूँ।
कि मेरे पांव में है जंज़ीर।
जले आसाम या कश्मीर।
चले गुजरात में शमशीर।
कि मैं एक जुम्मन हूँ कि मैं एक अब्दुल हूँ।
यह देखो मेरा स्तर है।
सेक्युलर मेरा मजहब है।
तवायफ मुझसे बेहतर है।
कि मैं एक जुम्मन हूँ कि मैं एक अब्दुल हूँ।

 

–  मोहम्मद नसीर

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