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jummangiri

Mohtarma noori ki majburi

Mohtarma noori ki majburi

जुम्मन और जुम्मनियाओ की इज्जत की बात ही न करना, ना जाने कितनी दफा सताए गए है।

स्टेज से हमको भगाया गया, या हम उर्दू नाम की वजह से सताए गए है।

ए जुम्मन अपने जुम्मनियाँ से कहना हक मांगने न पाए वो कॉम का।

आज ही हमने छोरी थी पार्टी आज ही हम फिर दरी बिछाए हुए है।

 

जहनी गुलामी ने हमको है मारा, जिस वजह से इस कदर सताए हुए है।

नाच करना ना हमारा था पेशा, पार्टी के इशारे पे नचाए गए है।

ऐ जुम्मन अपने जुम्मनिया से कह दे, प्यार बच भी न पाए कॉम का।

आज ही हमने कहा था है हम मुस्लिम, आज ही हम पूजा करके आए हुए है।

हां हम ना है गुलाम, पर मुफाद के आगे सताए गए है।

हमने कहा था कॉम का फायदा पर खुदका फायदा कराए हुए है।

तुम कहो के हमने थूक के चाटा,लेकिन हमतो जबरन चटाए गए है।

जो मंडवाली का लिया था हमने ठेका उसी ठेका को निभाए हुए है।गुलामी में हम तुम्हे क्या बताए किस कदर दरी बिछाए हुए है।

 

 

 

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