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Ye rishta kya kahlata hai?

Ye rishta kya kahlata hai?

ये रिश्ता क्या कहलाता है ?

सपा तथा बीजेपी का प्यार भी बसपन के प्यार जैसा ही है, सपा 1992 में बानी तभी बाबरी मस्जिद शहीद की गयी थी।उस समय बाबरी के क़ातिल कहे जाने वाले कल्याण सींग समेत 45 पॉलिटिशियन बीजेपी से सपा में शामिल हुए थे।

अब आपको लगता होगा के ये पार्टी तो मुल्ला मुलायम कहे जाने वाले मुस्लिमों के नेता मुलायम सिंह की है, फिर ऐसा क्यों?आपको बताता चलूँ के बाबरी वाले मामले में उन्होंने कारसेवक पे गोलियां चलाने का आदेश दे दिया था, बहुत लोग बताते है के इसके पीछे का कारण कुछ और ही था, लोगो की माने तो उस समय गोली चलवा कर मंदिर मस्जिद वाले हिंसा में बहुत तूल दे दिया था।

वैसे मुस्लिम विरोधी बयान देने के बाद सपा में शामिल होना भी एक ट्रेंड है, साक्षी महाराज बढ़ती पापुलेशन पर मुस्लिमों को दोसी बताने से लेके कई नफरती बयान देते थे, साथ ही मुस्लिम विरोधी बयान के लिए जाने जानी वाली विश्व हिन्दू परिषद् के अध्यक्ष के बेटा संजय डालमिया दोनों को अपने पार्टी से राज्य सभा संसद बनाया था।

आपको बताता चलूँ के अभी भी बीजेपी से स्वामी प्रसाद मौर्या शामिल हुए है जिनका कहना है के मुस्लिम महिलाये बच्चा पैदा करने की मशीन ह। ऐसे बयान बाज़ी के बाद सपा में शामिल होना कोई नया नहीं था, नया तो तब हुआ जब मौर्या ने ऊंचाहार से अपने बेटा के लिए सीट माँगा, नया इसीलिए है क्यों के इसी सीट पर मनोज पांडे ने मौर्या के बेटा को हराया था। एक और बात जो इस कड़ी के लिए महत्वपूर्ण है वो ये के मौर्या की पुत्री संघ मित्रा मौर्या अभी भी भाजपा से सांसद है।

वैसे इस बार विश्व हिन्दू परिशद के नेता सुनील सिंह भी सपा के के साइकिल पर सवार है, जिसने मुस्लिम महिलाओं को कब्र से निकल कर रेप कर देने जैसी अभद्र टिप्पनी की थी इससे बीजेपी और सपा में एक बहुत बरी समानता नज़र आती है।

वैसे इस बार मुलायम सिंह की पुतोह और अखिलेश की भौजाई “अपरना यादव”, तथा मुलायम सिंह के समधी समेत मुलायम के साढू प्रमोद गुप्ता भी भाजपा में शामिल हुए।

इतना होने के बाद भी अखिलेश यादव कहते है के हम बीजेपी को भगा रहे है भैया भगा रहे है या विलय कर रहे है ये तो उत्तरप्रदेश की जनता ही तय करेगी , लेकिन अभी फिलहाल तो अखिलेश भैया ने आजमगढ़ से नफीस जहाँ से विधायक है, वही से चुनाव लड़ने का निर्नय लिया है।  हाला के उसी आजमगढ़ में दुर्गा यादव भी विधायक है लेकिन उनके लिए उन्होंने नफीस के सीट से लड़ना तय किया।

 

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